सीकर। शेखावाटी के सबसे व्यस्त व्यापारिक केंद्रों में शुमार सीकर शहर इन दिनों विकास की महत्वाकांक्षा और स्थानीय आजीविका के बीच एक बड़े द्वंद्व का गवाह बन रहा है। बजरंग कांटा स्थित बजाज सर्किल से लेकर कृषि मंडी तिराहे तक की मुख्य सड़क को 100 फीट चौड़ा करने के नगर परिषद के फैसले ने एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की तैयारी के बीच जयपुर रोड के व्यापारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। तीन दिन पहले नगर परिषद कमिश्नर को चेताने के बाद, आज भारी संख्या में व्यापारियों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी दुकानों को बचाने के लिए गुहार लगाई है। यह मामला सिर्फ कंक्रीट की सड़क बनाने का नहीं है, बल्कि कल्याण सर्किल और बजाज रोड बेल्ट के उन सैकड़ों परिवारों के वजूद का है जिनकी तीन पीढ़ियां इसी बाजार के भरोसे पली-बढ़ी हैं।

सड़क 100 फीट की तो दुकानें खत्म: व्यापारियों ने दी 80 फीट की दलील
व्यापारियों का साफ कहना है कि वे शहर के विकास या सड़क चौड़ीकरण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर दशकों पुराने रोजगार को मटियामेट करना किसी भी सूरत में न्यायसंगत नहीं है। कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में व्यापारियों ने अपनी व्यथा और सुझावों का पूरा खाका सामने रखा है:
| व्यापारियों की मुख्य मांगें | वर्तमान समस्या (Landmark / Location) | प्रस्तावित समाधान (व्यापारियों के अनुसार) |
| सड़क की चौड़ाई | 100 फीट चौड़ीकरण से दुकानें पूरी तरह ध्वस्त हो जाएंगी। | सड़क की चौड़ाई को 80 फीट तक ही सीमित रखा जाए। |
| वॉल-टू-वॉल निर्माण | नालों और किनारों पर खुली जगह से ट्रैफिक अव्यवस्थित रहता है। | आरसीसी (RCC) ढक्कनों से नालों को ढककर वॉल-टू-वॉल सड़क बने। |
| भारी वाहनों का दबाव | डिपो तिराहे के पास लोक परिवहन बसों और भारी गाड़ियों का जाम। | सिटी बस और टैक्सी स्टैंड को शहर से बाहर शिफ्ट किया जाए। |
| बिजली के बुनियादी ढांचे | रोड के बीच और बेढंगे तरीके से खड़े खंभे और ट्रांसफार्मर (डीपी)। | इन सभी ट्रांसफार्मरों को व्यवस्थित कर बिल्कुल किनारों पर किया जाए। |
“50 साल पुराना बाजार उजड़ा, तो दाने-दाने को तरसेंगे सैकड़ों मजदूर”
जयपुर रोड व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह बाजार पिछले 50 वर्षों से स्थापित है। यहां केवल बड़े दुकानदार ही नहीं, बल्कि सैकड़ों की संख्या में दिहाड़ी मजदूर, पल्लेदार, सेल्समैन और मुनीम काम करते हैं।
कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा:
“हमने दशकों पहले तत्कालीन रोड यूटिलिटी नियमों के हिसाब से ही अपनी दुकानों का निर्माण किया था। अब अचानक नगर परिषद 100 फीट का डंडा चलाकर हमारे आशियाने उजाड़ना चाहती है। यदि यह तोड़फोड़ नहीं रुकी, तो सैकड़ों कर्मचारियों के सामने सीधे तौर पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। प्रशासन को अस्थाई अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग पर कार्रवाई करनी चाहिए, न कि पक्के रोजगार पर बुलडोज़र चलाना चाहिए।”
व्यापारियों ने कृषि उपज मंडी में आने-जाने वाले भारी वाहनों के लिए भी ‘एंट्री और एग्जिट’ गेट अलग-अलग करने की मांग की है, ताकि बजाज सर्किल पर लगने वाले जाम से स्थाई मुक्ति मिल सके।
त्रिकोणीय पक्ष: प्रशासन, जनता और व्यापारियों का नजरिया (Multi-Perspective)
- नगर परिषद/प्रशासन का रुख: प्रशासन का तर्क है कि जयपुर रोड पर रींगस-चौमूं की तरफ से आने वाले ट्रैफिक का दबाव हर साल 20% की दर से बढ़ रहा है। कृषि मंडी होने के कारण ट्रकों की आवाजाही चौबीसों घंटे रहती है। भविष्य के मास्टर प्लान को देखते हुए इस 100 फीट के रोड का निर्माण बेहद जरूरी है और सरकारी भूमि पर से हर हाल में अतिक्रमण हटाया जाएगा।
- आम जनता/राहगीरों की राय: स्थानीय वाहन चालकों और राहगीरों का कहना है कि बजाज सर्किल से कृषि मंडी तिराहे तक आधे-आधे घंटे का जाम लगना आम बात है। दुकानों के आगे होने वाली बेतरतीब पार्किंग और अस्थाई थड़ियों के कारण पैदल चलना भी दूभर है। सड़क का चौड़ा होना शहर के हित में है।
- एक्सपर्ट्स का सुझाव: शहरी नियोजन विशेषज्ञों (Urban Planners) के अनुसार, 100 फीट की सड़क तोड़े बिना भी ट्रैफिक सुधारा जा सकता है। अगर डिपो तिराहे से बसों का स्टॉपेज हटा दिया जाए, मल्टी-लेवल पार्किंग विकसित की जाए और बिजली के पोल शिफ्ट कर दिए जाएं, तो 80 फीट की सड़क भी वॉल-टू-वॉल होने पर पर्याप्त स्पेस देगी।