अलवर। मरुधरा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों के बीच अलवर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अलवर की अरावली विहार थाना पुलिस की साख पर उस वक्त बड़ा बट्टा लग गया, जब थाने में तैनात एक एएसआई (ASI) को एसीबी की टीम ने ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए सरेआम दबोच लिया। यह कार्रवाई केवल एक घूसखोर की गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि यह अलवर और आसपास के ग्रामीण इलाकों (जैसे मालाखेड़ा, रामगढ़) के उन आम नागरिकों की आंखें खोलने वाली रिपोर्ट है जो पुलिसिया जांच और मुकदमों के डर से अक्सर इन खाकीधारी दलालों का शिकार बन जाते हैं। यह घटना सीधे तौर पर यह संदेश देती है कि यदि आपके पास सही कानूनी जानकारी और हिम्मत है, तो कानून के रक्षक ही भक्षक बनने से पहले सलाखों के पीछे होंगे।

भूगोर तिराहे के रेस्टोरेंट पर बिछा ‘एसीबी का जाल’: शाम 4 बजे हुआ एक्शन
मंगलवार शाम करीब 4 बजे, जब शहर का भूगोर तिराहा अपनी सामान्य रफ़्तार से चल रहा था, वहीं पास के एक रेस्टोरेंट में एसीबी की टीम ने एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार कर रखा था। अरावली विहार थाने का ASI शंकर लाल शर्मा जैसे ही परिवादी से रिश्वत की आखिरी किस्त लेने पहुंचा, एसीबी ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।
| रिश्वत डील और एक्शन टाइमलाइन (14 जुलाई 2026) | घटना स्थल (Landmark) | क्या हुआ? |
| 13 जुलाई 2026 | अलवर एसीबी मुख्यालय | परिवादी ने बेटे को झूठे केस और गिरफ्तारी से बचाने के लिए शिकायत दर्ज कराई। |
| सत्यापन के दौरान | अरावली विहार थाना क्षेत्र | एसीबी ने शिकायत की पुष्टि की; ₹5,000 और ₹10,000 (कुल 15 हजार) की पहली दो किस्तें वेरिफाई हुईं। |
| 14 जुलाई, शाम 04:00 बजे | भूगोर तिराहा (अलवर) | आखिरी किस्त के ₹10,000 लेते ही एएसआई शंकर लाल शर्मा रंगे हाथों गिरफ्तार। |
पूरा मामला: ₹25 हजार का सौदा और ‘गिरफ्तारी’ का डर
अलवर एसीबी के डीएसपी शब्बीर खान के अनुसार, 13 जुलाई को एक पीड़ित पिता ने ब्यूरो के समक्ष उपस्थित होकर एक लिखित शिकायत दी थी। परिवादी ने बताया कि उसके बेटे के खिलाफ अरावली विहार थाने में मारपीट का एक मामला दर्ज है। इस मुकदमे की जांच (IO) एएसआई शंकर लाल शर्मा के पास थी।
जांच अधिकारी शंकर लाल ने पीड़ित परिवार को डराना शुरू किया और बेटे को थाने लाकर थर्ड-डिग्री टॉर्चर करने और जेल भेजने की धमकी दी। इस गिरफ्तारी और प्रताड़ना से बचाने के एवज में एएसआई ने ₹25,000 की रिश्वत की मांग रखी।
- पहली किस्त: आरोपी एएसआई सौदा तय होते ही ₹5,000 पहले ही डकार चुका था।
- सत्यापन की किस्त: जब एसीबी ने शिकायत का गुपचुप सत्यापन (Verification) करवाया, तो शातिर एएसआई ने उस दौरान भी ₹10,000 वसूल कर लिए।
- ट्रैप की किस्त: बाकी बचे ₹10,000 लेने के लिए उसने मंगलवार शाम परिवादी को भूगोर तिराहे के पास एक रेस्टोरेंट में चाय पर बुलाया, जो उसका आखिरी ठिकाना साबित हुआ।
म्यूचुअल सिंडिकेट: पुलिस थानों में रिश्वतखोरी पर जनता और एक्सपर्ट्स का पक्ष (Multi-Perspective)
- पब्लिक का गुस्सा: अलवर के स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का कहना है कि थानों में साधारण मारपीट या जमीनी विवाद के मामलों में भी एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बाद जांच अधिकारियों का रवैया पूरी तरह वसूली भाई जैसा हो जाता है। जब तक जेब ढीली न की जाए, पुलिस पीड़ितों की सुनवाई नहीं करती।
- प्रशासकीय/एसीबी का पक्ष: एसीबी मुख्यालय का कहना है कि राजस्थान में ‘भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश’ अभियान के तहत टोल-फ्री नंबरों पर लगातार शिकायतें आ रही हैं। पुलिस विभाग में निचले स्तर पर फैले इस रोग को खत्म करने के लिए आंतरिक विजिलेंस और एसीबी की टीमें पूरी तरह सक्रिय हैं।
- विधिक विशेषज्ञों की राय: सीनियर क्रिमिनल वकीलों के अनुसार, मारपीट के साधारण मामलों में (यदि चोट गंभीर न हो) पुलिस को सुप्रीम कोर्ट के ‘अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य’ फैसले के तहत सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है, उन्हें पहले धारा 35 (BNS) का नोटिस देना होता है। लेकिन आम जनता इस कानून से अनजान होती है, जिसका फायदा उठाकर एएसआई स्तर के अधिकारी ‘गिरफ्तारी का डर’ दिखाकर लाखों की उगाही करते हैं।