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शेखावाटी में ‘सोने की डिजिटल डकैती’: 3 करोड़ के गहने चुराकर नवलगढ़ के तालाब किनारे जमीन में गाड़े; लॉजिस्टिक कंपनी का पूर्व कर्मचारी ही निकला मास्टरमाइंड

नवलगढ़ (झुंझुनूं)। शेखावाटी की शांत फिजाओं और नवलगढ़ की हवेलियों के बीच इन दिनों एक बेहद सनसनीखेज और हाई-प्रोफाइल इंटरनेशनल लुक वाली ‘ट्रेन रॉबरी’ की चर्चा जोरों पर है। दिल्ली से पंजाब जा रही एक ट्रेन से 3 करोड़ रुपये के सोने के गहनों की चोरी का मामला आखिरकार झुंझुनूं के नवलगढ़ इलाके में आकर खुला है। हरियाणा राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और नवलगढ़ थाना पुलिस के संयुक्त ‘क्रैकडाउन’ ने फिल्मी अंदाज में कार्रवाई करते हुए नवलगढ़ क्षेत्र से तीन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन चोरों ने पुलिस के डर से करीब 2 करोड़ रुपये का सोना नवलगढ़ के कल्याणपुरा स्थित एक मंदिर के पास जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर गाड़ दिया था, जिसे पुलिस ने फावड़ों से खुदाई करवाकर बरामद कर लिया है। यह घटना शेखावाटी के उन व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए भी एक सबक है जो बिना बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के अपनी कंपनियों में बाहरी या स्थानीय स्टाफ रखते हैं।

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शेखावाटी में 'सोने की डिजिटल डकैती': 3 करोड़ के गहने चुराकर नवलगढ़ के तालाब किनारे जमीन में गाड़े; लॉजिस्टिक कंपनी का पूर्व कर्मचारी ही निकला मास्टरमाइंड 2

पानी पीने उतरा कर्मचारी और 3 करोड़ ‘साफ’: जाखल स्टेशन पर 2 मिनट का खेल

यह पूरी वारदात 10 जून 2026 की है, जब एक लॉजिस्टिक कंपनी का विश्वस्त कर्मचारी नरेंद्र सिंह दिल्ली से 3 करोड़ रुपये के सोने के गहनों की भारी खेप लेकर बठिंडा (पंजाब) के लिए ट्रेन से रवाना हुआ था।

जब ट्रेन हरियाणा के जाखल (फतेहाबाद) रेलवे स्टेशन पर रुकी, तो नरेंद्र सिंह प्यास लगने के कारण पानी की बोतल भरने के लिए महज दो मिनट के लिए नीचे उतरा। बदमाश इसी सुनहरे मौके की ताक में थे। जैसे ही कर्मचारी अपनी सीट से हटा, बदमाशों ने सेकंडों के भीतर गहनों से भरा भारी बैग उठाया और स्टेशन से गायब हो गए।

आरोपी का नामपैतृक निवास (नवलगढ़ बेल्ट)गिरोह में भूमिकावर्तमान स्थिति
ऋषभडेरावाली ढाणी, नवलगढ़मास्टरमाइंड (पूर्व कर्मचारी)गिरफ्तार (7-10 जुलाई की दबिश)
गोविंदडेरावाली ढाणी, नवलगढ़रेकी और ट्रांसपोर्टेशन पार्टनरगिरफ्तार (7-10 जुलाई की दबिश)
बबलूनवलड़ी, नवलगढ़लॉजिस्टिक्स और छुपाने में मददगारगिरफ्तार (कल्याणपुरा से दबोचा)

‘इनसाइडर जॉब’: 2 महीने की रेकी और सिक्योरिटी सिस्टम की पूरी कुंडली

जब हरियाणा जीआरपी और पुलिस ने मामले की तकनीकी तफ्तीश शुरू की, तो यह साफ हो गया कि यह बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के मुमकिन नहीं था।

  • भेदिया ही निकला चोर: गिरोह का मुख्य सूत्रधार ऋषभ पहले उसी लॉजिस्टिक कंपनी में काम कर चुका था। उसे अच्छी तरह पता था कि दिल्ली से पंजाब के बीच किस दिन, किस ट्रेन से और किस पैकिंग स्टाइल में सोने की सप्लाई की जाती है।
  • मास्टर प्लान: ऋषभ ने करीब 2 महीने तक दिल्ली से बठिंडा के बीच चलने वाले कर्मचारियों की टाइमिंग की रेकी की। इसके बाद उसने अपने नवलगढ़ बेल्ट के साथियों गोविंद और बबलू को इस प्लान में शामिल कर वारदात को अंजाम दिया।

कल्याणपुरा तालाब के पास खुदाई: 2 करोड़ का सोना बरामद, 1 करोड़ अब भी गायब

वारदात के बाद आरोपी सीधे नवलगढ़ भाग आए। हरियाणा एसआईटी (SIT) को इनपुट मिलते ही उन्होंने नवलगढ़ थानाधिकारी (CI) अजय सिंह की टीम के साथ मिलकर जाल बिछाया। पुलिस ने 7 और 10 जुलाई को नवलगढ़ की डेरावाली ढाणी में ताबड़तोड़ छापेमारी की, जहां से ऋषभ और गोविंद को धर दबोचा गया। इसके बाद इनके तीसरे साथी बबलू को नवलड़ी से उठाया गया।

नवलगढ़ पुलिस का बड़ा खुलासा: “आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से सोने के गहनों को आपस में बांट लिया था। इसके बाद उन्होंने कल्याणपुरा (नवलगढ़) के तालाब के पास स्थित मंदिर के निकट सुनसान जगह पर जमीन में गहरा गड्ढा खोदा और 2 करोड़ का सोना उसमें दबा दिया। पुलिस ने निशानदेही पर जमीन खोदकर सारा सोना जब्त कर लिया है, लेकिन 1 करोड़ के गहने और कुछ सह-आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश में छापे मारे जा रहे हैं।”

लॉजिस्टिक्स सिक्योरिटी और भारतीय न्याय संहिता के कड़े नियम (E-E-A-T Insights)

इतनी बड़ी मात्रा में कीमती धातुओं को बिना किसी गनमैन या विशेष सुरक्षा के सामान्य ट्रेन बोगी में ले जाना लॉजिस्टिक कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।

कानूनी प्रावधान और धाराएं:

  • ट्रेन में चोरी और फ्रॉड (BNS की धारा 305 & 316): चलती ट्रेन या रेलवे परिसर में चोरी करना और किसी संस्था के साथ अमानत में ख्यानत (Breach of Trust) करने के तहत आरोपियों पर गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इसमें 7 से 10 साल तक की कठोर जेल का प्रावधान है।
  • बरामदगी का कानून: पुलिस के अनुसार, आरोपियों द्वारा जमीन में दबाकर छिपाया गया माल ‘रिकवरी एक्ट’ के तहत कोर्ट में सबसे बड़ा पुख्ता सबूत बनता है, जिससे आरोपियों की जमानत याचिकाएं पूरी तरह खारिज हो जाती हैं।

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