बीकानेर/खाजूवाला (राजस्थान)। राजस्थान की पश्चिमी अंतरराष्ट्रीय सीमा, जो कभी अपनी अभेद्य सुरक्षा के लिए जानी जाती थी, अब आधुनिक तकनीक से लैस नार्को-तस्करों के निशाने पर है। बीकानेर का खाजूवाला सेक्टर इस समय पाकिस्तान की ‘ड्रोन साजिश’ का सबसे सॉफ्ट टारगेट बन गया है। आलम यह है कि पिछले 4 महीनों में ही इस रूट से 342 करोड़ रुपये मूल्य की 67 किलो से अधिक हेरोइन और भारी मात्रा में हथियार बरामद हो चुके हैं। सवाल यह है कि आखिर देश के सबसे आधुनिक ‘D-4’ एंटी-ड्रोन सिस्टम को लगाने में देरी क्यों हो रही है, जिसका फायदा उठाकर दुश्मन आसमान से जहर बरसा रहा है।

पाकिस्तान की ‘ऊंची’ साजिश: न दिखाई देते हैं, न सुनाई देते हैं
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, तस्कर अब पुराने तरीकों को छोड़कर ‘डार्क ड्रोन’ तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। ये ड्रोन 3 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ते हैं। इतनी ऊंचाई पर तैनात बीएसएफ (BSF) के जवानों को न तो ये ड्रोन दिखाई देते हैं और न ही इनकी आवाज सुनाई देती है। बिना एंटी-ड्रोन तकनीक के इन आधुनिक तस्करों को पकड़ना ठीक वैसा ही है जैसे अंधेरे में सुई ढूंढना।
क्या है ‘D-4’ कवच और कहाँ फंसा है पेंच? (Technical Expansion)
D-4 का मतलब है— Detect, Deter, and Destroy। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विशेष रूप से दुश्मन के ड्रोन को नेस्तनाबूद करने के लिए बनाया है।
- सॉफ्ट किल: यह सिस्टम ड्रोन के सिग्नल जाम कर देता है जिससे वह कंट्रोल खो देता है।
- हार्ड किल: यह लेजर बीम के जरिए उड़ते हुए ड्रोन को हवा में ही जलाकर राख कर सकता है।पेंच कहाँ है?: पंजाब बॉर्डर पर घुसपैठ बढ़ने के कारण वहां एंटी-ड्रोन सिस्टम को प्राथमिकता दी गई, जिसके कारण बीकानेर और श्रीगंगानगर बॉर्डर ‘सेफ पैसेज’ बन गए हैं। तकनीकी उपकरणों की कमी और प्रशासनिक देरी का खामियाजा सीमावर्ती सुरक्षा को भुगतना पड़ रहा है।

भास्कर एनालिसिस: खाजूवाला में तस्करी बढ़ने के 6 बड़े कारण
| कारण | विवरण |
| सिस्टम का अभाव | D-4 एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती अब तक नहीं हुई है। |
| डार्क ड्रोन तकनीक | 3 किमी की ऊंचाई और थर्मल कैमरे से लैस ड्रोन का उपयोग। |
| पुलिस की सुस्ती | खाजूवाला में 32 हेड और सीसाड़ा बॉर्डर पुलिस चौकियों पर ताले लटके हैं। |
| रिक्त पद | सीमावर्ती थानों में बीट कांस्टेबल तक के पद खाली पड़े हैं। |
| जेल नेटवर्क | तस्करी का असली कंट्रोल रूम पंजाब की जेलों में बैठा है। |
| सूचना तंत्र फेल | ग्राम रक्षक दल केवल कागजों में सिमट कर रह गए हैं। |
हाइपर-लोकल इम्पैक्ट: बीकानेर और श्रीगंगानगर के गांवों में दहशत
खाजूवाला, छत्तरगढ़ और दंतौर जैसे सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। तस्करी के इस नेटवर्क में स्थानीय युवाओं को लालच देकर शामिल किया जा रहा है। 5 पिस्तौल और गोला-बारूद की बरामदगी इशारा करती है कि यह केवल नशा नहीं, बल्कि देश के खिलाफ एक बड़ी आतंकी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।
4 माह का रिपोर्ट कार्ड: बीकानेर-श्रीगंगानगर बॉर्डर
- कुल हेरोइन जब्ती: 67.224 किलोग्राम।
- बाजार मूल्य: ₹342.3 करोड़ (लगभग)।
- गिरफ्तार तस्कर: 25 से अधिक (ज्यादातर पंजाब के जलालाबाद और स्थानीय नेटवर्क के सदस्य)।
- हथियार बरामदगी: 5 अत्याधुनिक पिस्तौल और भारी मात्रा में कारतूस।
Smart FAQ Section: सीमा सुरक्षा और ड्रोन से जुड़े सवाल
1. क्या आम नागरिक ड्रोन दिखने पर बीएसएफ को सूचना दे सकते हैं?
हाँ, बीएसएफ ने इसके लिए रिवॉर्ड स्कीम भी चला रखी है। संदिग्ध ड्रोन की जानकारी देने वाले को उचित पुरस्कार और सुरक्षा दी जाती है।
2. पाकिस्तान बीकानेर बॉर्डर को ही क्यों चुन रहा है?
पंजाब बॉर्डर पर एंटी-ड्रोन फेंसिंग और सख्त निगरानी के कारण तस्करों ने अपना रूट राजस्थान की ओर शिफ्ट किया है, जहाँ फिलहाल तकनीकी निगरानी कम है।
3. ग्राम रक्षक दल का काम क्या है?
इनका मुख्य काम सीमावर्ती गांवों में अनजान लोगों की आवाजाही और ड्रोन की लैंडिंग की सूचना तुरंत सुरक्षा बलों को देना है।
Editor’s Note: अब केवल मानवीय चौकसी काफी नहीं
निष्कर्ष: यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि 21वीं सदी की तस्करी का मुकाबला 20वीं सदी के पारंपरिक तरीकों से नहीं किया जा सकता। जब तस्कर ड्रोन और डार्क वेब का उपयोग कर रहे हैं, तब बीएसएफ को केवल आंखों और कानों पर निर्भर छोड़ना जोखिम भरा है। सरकार को चाहिए कि खाजूवाला और बीकानेर सेक्टर में तत्काल D-4 एंटी-ड्रोन सिस्टम और थर्मल इमेजिंग कैमरों की तैनाती करे। साथ ही, बॉर्डर थानों में खाली पड़े पदों को भरना और ग्राम रक्षक दलों को आधुनिक संचार उपकरणों से लैस करना अनिवार्य है।