भरतपुर। पूर्वी राजस्थान के मेवात और ब्रज क्षेत्र में जमीन और धार्मिक प्रतीकों को लेकर सामाजिक तनाव की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। भरतपुर जिले के रुदावल थाना इलाके में मंगलवार को एक ऐसा ही संवेदनशील मामला सामने आया, जहां बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा और भवन के लिए अलॉट (आबंटित) की गई सरकारी जमीन पर कुछ लोगों ने रातों-रात भगवान हनुमान की मूर्ति स्थापित कर दी. इस घटना के बाद गांव के दो गुट आमने-सामने हो गए और देखते ही देखते माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर मोर्चा संभाला और दोनों पक्षों के बीच सूझबूझ से समझाइश कर एक बड़े सामाजिक टकराव को टाल दिया.

खाली जमीन पर रातों-रात स्थापना: सुबह भड़का ग्रामीणों का आक्रोश
मामला रुदावल क्षेत्र के महलपुर चूरा गांव का है. तहसीलदार राकेश गिरी के अनुसार, राज्य सरकार ने साल 2023 में इस गांव में दलित समाज और बाबा साहब के समर्थकों की मांग पर अंबेडकर भवन और प्रतिमा के लिए एक भूखंड आधिकारिक रूप से अलॉट किया था. चूंकि यह जमीन फिलहाल खाली पड़ी थी, इसी का फायदा उठाकर मंगलवार को कुछ असामाजिक तत्वों ने वहां हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर दी.
जैसे ही सुबह दूसरे पक्ष के लोगों को इसकी भनक लगी, ग्रामीण लामबंद हो गए और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई. दोनों पक्षों में तीखी बहसबाजी शुरू हो गई और गांव में सांप्रदायिक/जातीय तनाव की स्थिति पैदा हो गई.
| घटनाक्रम की क्रोनोलॉजी (मंगलवार) | स्थान / Landmark | वर्तमान स्थिति व एक्शन |
| साल 2023 (पृष्ठभूमि) | महलपुर चूरा गांव (भरतपुर) | सरकार द्वारा अंबेडकर भवन व प्रतिमा हेतु भूमि का आधिकारिक आबंटन. |
| मंगलवार सुबह 08:00 बजे | आबंटित खाली भूखंड | भूखंड पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित देख दूसरा पक्ष आक्रोशित हुआ. |
| मंगलवार दोपहर 11:30 बजे | विवादित स्थल (रुदावल) | रुदावल थाना पुलिस और तहसीलदार राकेश गिरी भारी जाब्ते के साथ पहुंचे. |
| मंगलवार दोपहर 02:00 बजे | स्थानीय मंदिर परिसर | दोनों पक्षों की सहमति के बाद मूर्ति को आदर सहित मंदिर में शिफ्ट किया गया. |
प्रशासन का ‘न्यूट्रल’ स्टैंड: आपसी सहमति से मंदिर में रखवाई गई प्रतिमा
तनाव की सूचना मिलते ही रुदावल थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दलबल के साथ महलपुर चूरा गांव पहुंचे. अधिकारियों ने दोनों पक्षों के प्रबुद्ध लोगों और ग्रामीणों को एक जगह बैठाया और कानूनी स्थिति स्पष्ट की:
- पहले पक्ष की दलील: भीमराव अंबेडकर के समर्थकों की मांग थी कि जब यह जमीन 2023 से सरकार द्वारा अधिकृत रूप से भवन के लिए रिजर्व है, तो इस पर किसी भी प्रकार का अन्य निर्माण या स्थापना पूरी तरह अवैध है.
- दूसरे पक्ष का तर्क: कुछ ग्रामीणों का कहना था कि यह जमीन सामुदायिक उपयोग के लिए है, इसलिए वे यहां हनुमान जी की स्थापना करना चाहते थे.
- सहमति का फॉर्मूला: तहसीलदार और थानाधिकारी ने स्पष्ट किया कि अलॉटमेंट के नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है. इसके बाद भगवान हनुमान की प्रतिमा को पूरे आदर और मर्यादा के साथ विवादित स्थल से हटाकर गांव के ही एक मंदिर में स्थापित करवा दिया गया, जिस पर अंततः दोनों पक्षों ने रजामंदी जताई.
मेवात-ब्रज बेल्ट में जमीनी विवाद और सामाजिक ताना-बाना (Multi-Perspective)
- प्रशासनिक सतर्कता: भरतपुर और अलवर (मेवात बेल्ट) में इस तरह के भूमि विवाद बहुत जल्दी सांप्रदायिक या जातीय हिंसा का रूप ले लेते हैं. यही कारण है कि रुदावल पुलिस ने बिना देरी किए गांव में अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात कर दिया है, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे.
- पब्लिक का नजरिया: स्थानीय युवाओं का कहना है कि गांवों में असामाजिक तत्व जानबूझकर खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर धार्मिक प्रतीक रखकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं, जिससे विकास कार्य (जैसे अंबेडकर भवन का निर्माण) अटक जाते हैं.
- कानूनी विशेषज्ञों की राय: राजस्थान पंचायती राज और राजस्व अधिनियम के तहत, एक बार जब कोई भूमि किसी विशेष सामाजिक या सरकारी संगठन (जैसे अंबेडकर ट्रस्ट) के नाम अलॉट हो जाती है, तो उस पर किया गया कोई भी अन्य निर्माण ‘अतिक्रमण’ (Encroachment) की श्रेणी में आता है और प्रशासन को उसे 24 घंटे के भीतर हटाने का पूरा कानूनी अधिकार है.