अजमेर। राजस्थान का हृदय स्थल कहा जाने वाला अजमेर इन दिनों अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों के निशाने पर है। सालासर-सीकर बेल्ट से लेकर अजमेर तक फैले इस डिजिटल नेटवर्क पर प्रहार करते हुए अजमेर की रामगंज थाना पुलिस और जिला साइबर सेल ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर देशभर के मासूम इंटरनेट यूजर्स को अपनी ठगी का शिकार बनाने वाले तीन शातिर बदमाशों को पुलिस ने धर दबोचा है। यह गिरोह सोशल मीडिया पर ‘क्लिक-बैट’ (Click-Bait) विज्ञापनों के जरिए जाल बिछाता था और जैसे ही कोई यूजर इनके झांसे में आकर पैसे ट्रांसफर करता, ये पूरी वेबसाइट ही डिलीट कर रफूचक्कर हो जाते थे।

तड़के 13 जुलाई का ‘ऑपरेशन विनायक पथ’: किराए के मकान में चल रहा था कंट्रोल रूम
अजमेर एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला के कुशल निर्देशन में रामगंज पुलिस और साइबर सेल की टीम इन दिनों संदिग्ध ठिकानों पर पैनी नजर रखे हुए थी। 13 जुलाई की रात पुलिस को एक सटीक मुखबिर तंत्र से सूचना मिली कि न्यू चंद्रा नगर, विनायक पथ स्थित एक सुनसान मकान में कुछ बाहरी युवक संदिग्ध तकनीकी गतिविधियां चला रहे हैं।
साइबर सेल प्रभारी विजय सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम ने तुरंत योजनाबद्ध तरीके से उस मकान पर दबिश दी। पुलिस जब अंदर घुसी तो कमरे का नजारा देखकर दंग रह गई; वहां तीन युवक कई स्क्रीन, मोबाइल और डेटा केबल्स के साथ ऑनलाइन ठगी के लाइव कूरियर बने बैठे थे।
| गिरफ्तार आरोपियों का विवरण | उम्र | पैतृक निवास (नागौर बेल्ट) | गिरोह में भूमिका |
| रामाकिशन उर्फ प्रकाश भींचर | 19 वर्ष | डाबोली मीठी, थाना डेगाना | मुख्य सरगना और मास्टरमाइंड |
| कैलाश | 22 वर्ष | छोटी खाटू, थाना खुनखुना | म्यूल अकाउंट्स और ट्रांजैक्शन मैनेजर |
| गोपाल डूकिया | 18 वर्ष | जायल, नागौर | सोशल मीडिया विज्ञापन और लिंक प्रमोटर |
ठगी का ‘म्यूडस ऑपेरेंडी’: 2 मिनट का गेम और म्यूल अकाउंट्स का मकड़जाल
पुलिस पूछताछ में सरगना रामाकिशन ने जो खुलासे किए हैं, वे किसी भी स्मार्टफोन यूजर की आंखें खोलने के लिए काफी हैं। इस गिरोह का ठगी का तरीका बेहद आधुनिक और मनोवैज्ञानिक था:
- लुभावने विज्ञापन: ये लोग इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘1 से 2 मिनट में मोटी रकम जीतें’ जैसे गेमिंग विज्ञापन चलाते थे।
- रजिस्ट्रेशन का झांसा: जैसे ही कोई यूजर लालच में आकर लिंक पर क्लिक करता, उसे बड़ा इनाम जीतने का लालच देकर पहले कुछ हजार रुपये ‘सिक्योरिटी या रजिस्ट्रेशन मनी’ के नाम पर जमा कराने को कहा जाता था।
- वेबसाइट वैनिश (Vanish) फॉर्मूला: जैसे ही पीड़ित अपने यूपीआई (UPI) या नेट बैंकिंग से पैसे ट्रांसफर करता, आरोपी तुरंत वेबसाइट को सर्वर से डिलीट (बंद) कर देते थे और यूजर का संपर्क हमेशा के लिए टूट जाता था।
- म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) का खेल: पकड़े जाने के डर से ये शातिर अपराधी ठगी की रकम सीधे अपने निजी बैंक खातों में नहीं मंगाते थे। ये गरीब या अनपढ़ लोगों के खातों (जिन्हें साइबर की भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है) को कुछ कमिशन देकर किराए पर लेते थे और पैसा आते ही उसे कैश में निकाल लेते थे।
देशव्यापी नेटवर्क: रामगंज थाने में मुकदमा दर्ज, आईटी एक्ट की कड़क धाराएं (E-E-A-T Insights)
पुलिस ने दबिश के दौरान मौके से 1 हाई-टेक लैपटॉप और 6 एक्टिव मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पकड़े गए सभी आरोपी पिछले 10-15 दिनों से अजमेर के रामगंज इलाके में छिपकर रह रहे थे।
कानूनी कार्रवाई और धाराएं:
- एफआईआर दर्ज: रामगंज थाने में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी से जुड़ी धाराओं और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट (IT Act) के तहत मुकदमा संख्या 237/2026 दर्ज किया गया है।
- अकाउंट्स फ्रीज: साइबर सेल ने उन सभी संदिग्ध बैंक खातों के ट्रांजैक्शन को ब्लॉक और फ्रीज करवा दिया है, जिनमें पिछले 15 दिनों में लाखों रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। पुलिस को आशंका है कि बैंक स्टेटमेंट पूरी तरह आने के बाद ठगी का आंकड़ा करोड़ों में जा सकता है।