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श्रीगंगानगर तेजाब हमला: 13 साल की मासूम पर एसिड फेंकने वाले दरिंदे को 10 साल की जेल; ‘सीसीटीवी’ और ‘केमिकल मिलान’ ने सलाखों के पीछे पहुँचाया

श्रीगंगानगर (राजस्थान)। सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर की पोक्सो कोर्ट (POCSO Court) ने शनिवार को एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए समाज में खौफ पैदा करने वाले एक अपराधी को सबक सिखाया है। इसी साल जनवरी में केसरीसिंहपुर इलाके में एक 13 साल की स्कूली छात्रा पर तेजाब फेंकने वाले आरोपी को अदालत ने 10 साल के कठोर कारावास और 1 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि एसिड अटैक जैसे जघन्य अपराधों के खिलाफ एक नजीर भी है।

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श्रीगंगानगर तेजाब हमला: 13 साल की मासूम पर एसिड फेंकने वाले दरिंदे को 10 साल की जेल; 'सीसीटीवी' और 'केमिकल मिलान' ने सलाखों के पीछे पहुँचाया 2

वारदात का खौफनाक मंजर: स्कूल जाते समय बुना मौत का जाल

घटना 16 जनवरी, 2026 की सुबह की है जब एक 13 साल की मासूम अपनी सहेलियों के साथ स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी। जैसे ही वह सुभाष पार्क के पास पहुँची, एक बाइक सवार युवक वहां आया। आरोपी ने अपनी पहचान छुपाने के लिए चेहरा कपड़े से ढका हुआ था। उसने अचानक छात्रा के चेहरे को निशाना बनाकर तेजाब फेंक दिया।

  • मासूम की सूझबूझ: बच्ची ने फुर्ती दिखाते हुए अपना चेहरा दूसरी ओर घुमा लिया, जिससे उसकी आँखें और चेहरा बड़ी त्रासदी से बच गए।
  • झुलसा शरीर: चेहरे पर सीधा प्रहार न होने के बावजूद तेजाब के छींटे छात्रा के शरीर और कपड़ों पर गिरे, जिससे वह बुरी तरह झुलस गई।

पुलिस की वैज्ञानिक जांच: सीसीटीवी फुटेज ने खोली पोल (Investigative Analysis)

केसरीसिंहपुर थाना पुलिस ने इस मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लिया:

  1. डिजिटल फुटप्रिंट्स: पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के दर्जनों सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले।
  2. दुकान का सुराग: जांच के दौरान पुलिस श्रीगंगानगर की उस दुकान तक पहुँची जहाँ से आरोपी ने तेजाब खरीदा था। दुकानदार और दुकान के सीसीटीवी फुटेज ने आरोपी की पहचान की पुष्टि कर दी।
  3. केमिकल मिलान: एफएसएल (FSL) जांच में छात्रा के कपड़ों पर मिले तेजाब के नमूनों का मिलान उसी तेजाब से हुआ जो आरोपी ने दुकान से खरीदा था। इस पुख्ता तकनीकी साक्ष्य ने अदालत में आरोपी के बचने का कोई रास्ता नहीं छोड़ा।

डेटा और फैक्ट एक्सपेंशन: राजस्थान में एसिड अटैक के विरुद्ध कानून (Legal Perspective)

राजस्थान में एसिड अटैक की घटनाएं चिंता का विषय रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार (Laxmi vs. Union of India), खुले में तेजाब की बिक्री पर सख्त पाबंदी है।

  • सजा का प्रावधान: भारतीय दंड संहिता (अब भारतीय न्याय संहिता) और पोक्सो एक्ट के तहत एसिड हमले के लिए न्यूनतम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
  • मुआवजा: अदालत द्वारा लगाए गए जुर्माने की राशि (1 लाख रुपये) आमतौर पर पीड़िता के इलाज और पुनर्वास के लिए दी जाती है।

हाइपर-लोकल इम्पैक्ट: श्रीगंगानगर और केसरीसिंहपुर में सुरक्षा की मांग

श्रीगंगानगर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूली छात्राओं की सुरक्षा को लेकर इस घटना के बाद काफी आक्रोश देखा गया था। शनिवार को जब जज राजेश कुमार ने फैसला सुनाया, तो लोगों ने इसे कानून की जीत बताया। पीड़िता की ओर से अधिवक्ता रमनदीप सिंह और पश्लीन कौर ने मजबूती से पक्ष रखा, जिससे आरोपी को सजा तक पहुँचाया जा सका।

मामले का सारांश (Quick Facts Table)

मुख्य बिंदुविवरण
पीड़िता13 वर्षीय स्कूली छात्रा
घटना की तारीख16 जनवरी 2026
सजा10 साल का कठोर कारावास
जुर्माना1 लाख रुपये
निर्णय सुनाने वाले जजश्री राजेश कुमार

Smart FAQ Section: एसिड अटैक और कानूनी अधिकार

1. क्या तेजाब बेचना कानूनन अपराध है?

बिना लाइसेंस और बिना रिकॉर्ड (खरीदार का आईडी और कारण) रखे तेजाब बेचना गैर-कानूनी है। उल्लंघन करने पर दुकानदार का लाइसेंस रद्द हो सकता है और सजा भी हो सकती है।

2. एसिड अटैक पीड़िता को सरकारी सहायता क्या मिलती है?

राजस्थान सरकार और विक्टिम कंपंसेशन स्कीम के तहत पीड़िता को इलाज के लिए आर्थिक सहायता और पुनर्वास के लिए फंड मिलता है।

3. पोक्सो कोर्ट (POCSO Court) क्या है?

यह बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों और अन्य गंभीर हिंसा के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए बनाई गई विशेष अदालत है।

Editor’s Note: समाज की चुप्पी अपराधी का हौसला बढ़ाती है

निष्कर्ष: श्रीगंगानगर पोक्सो कोर्ट का यह फैसला उन अपराधियों के लिए एक सख्त संदेश है जो सोचते हैं कि चेहरा ढककर वे कानून से बच निकलेंगे। लेकिन इस केस ने यह भी साबित किया कि सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्य आज के दौर में सबसे बड़े गवाह हैं। समाज और अभिभावकों को भी चाहिए कि वे बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ के साथ-साथ ‘डिजिटल सुरक्षा’ और ‘अपरिचितों के खतरों’ के प्रति सजग करें। यह फैसला केवल एक सजा नहीं, बल्कि उस बहादुर बच्ची के संघर्ष की जीत है जिसने मौत के मुँह से लौटकर अपना बयान दर्ज कराया।

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