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भरतपुर गंगा मंदिर: 89 साल बाद पूर्ण होगा स्थापत्य का सपना; राम मंदिर के आर्किटेक्ट ने संवारा डिजाइन

भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर में स्थित देश के सबसे विशाल गंगा मंदिरों में से एक अब अपने पूर्ण और भव्य स्वरूप में नजर आएगा। 1845 में शुरू हुआ यह मंदिर निर्माण, जो 92 साल तक चलने के बाद भी अधूरा रह गया था, अब 7 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जा रहा है। इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसका शिखर और मुख्य द्वार उसी बंशी पहाड़पुर के बलुआ पत्थरों से बनेगा, जिससे मंदिर का मूल ढांचा बना है, ताकि प्राचीन और नए निर्माण में पूर्ण समानता रहे।

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भरतपुर गंगा मंदिर: 89 साल बाद पूर्ण होगा स्थापत्य का सपना; राम मंदिर के आर्किटेक्ट ने संवारा डिजाइन 2

तीन प्रमुख शैलियों का अद्भुत संगम

अभी तक यह मंदिर अपनी यूरोपियन और द्रविड़ स्थापत्य शैली के लिए जाना जाता था। लेकिन नए निर्माण के बाद इसमें ‘नागर शैली’ का भी समावेश हो जाएगा:

  • शिखर (नागर शैली): मंदिर का शिखर 50 फुट ऊंचा बनाया जाएगा। पूर्व में यहां केवल ईंटों का ढांचा था, जिसे अब नागर शैली के पत्थरों से भव्य रूप दिया जाएगा।
  • प्रवेश द्वार (40 फीट): मुख्य द्वार 44 फीट चौड़ा और 40 फीट ऊंचा होगा। इसमें भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जो मां गंगा के वेग को धारण करने वाले स्वरूप को दर्शाएगी। प्रवेश द्वार के साथ ही दो प्रसाद कक्ष और रसोई का भी जीर्णोद्धार होगा।

इतिहास के झरोखे से: महाराजा बलवंत सिंह की विरासत

  • शुरुआत: मंदिर का निर्माण 1845 में तत्कालीन महाराजा बलवंत सिंह ने शुरू करवाया था।
  • विशालता: यह मंदिर 275 गुणा 275 फीट के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • प्राण प्रतिष्ठा: शिखर और मुख्य गेट के अभाव में ही 1937 में तत्कालीन महाराजा ब्रजेंद्र सिंह ने यहाँ मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कराई थी। तब से अब तक यह मंदिर अपने पूर्ण शिखर की प्रतीक्षा कर रहा था।

विकास की समयसीमा और बजट

भरतपुर विकास प्राधिकरण (BDA) इस परियोजना की निर्माण एजेंसी है। राज्य सरकार ने विशेष बजट के माध्यम से इसके ऐतिहासिक महत्व को संरक्षित करने का निर्णय लिया है।

  • लागत: करीब 7 करोड़ रुपए।
  • पूर्ण होने की तिथि: मार्च 2027 तक कार्य पूरा होने की संभावना है।
  • अतिरिक्त कार्य: मंदिर के चारों ओर स्थित दुकानों को भी उनके प्राचीन स्वरूप में वापस लाया जा रहा है ताकि पूरा परिसर एक ऐतिहासिक विरासत जैसा दिखे।

बीडीए आयुक्त कनिष्क कटारिया के अनुसार, इस सौंदर्यीकरण और संरक्षण कार्य से मंदिर की ऐतिहासिकता बरकरार रहेगी और यह पर्यटन व आस्था के बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा।

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