जयपुर। राजधानी के जे.के. लोन अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए जिला कलेक्टर संदेश नायक गुरुवार सुबह करीब 11 बजे अस्पताल पहुँचे। उनके साथ अस्पताल अधीक्षक डॉ. आर.एम. सेहरा और अन्य प्रशासनिक डॉक्टर भी मौजूद रहे। कलेक्टर ने ओपीडी ब्लॉक, एनआईसीयू (NICU), जनरल वार्ड और लैब का गहन निरीक्षण किया।

गर्मी और पानी की व्यवस्था पर जोर
भीषण गर्मी को देखते हुए कलेक्टर ने विशेष निर्देश जारी किए:
- कूलिंग व्यवस्था: वार्डों में बच्चों के लिए लगाए गए कूलर, पंखे और डक्टिंग व्यवस्था की समीक्षा की।
- छाया और बैठक: ओपीडी ब्लॉक और कॉमन एरिया, जहाँ मरीजों के परिजन रुकते हैं, वहाँ कूलर, पंखे और पर्याप्त छाया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
- शुद्ध पेयजल: जहाँ वॉटर कूलर या आरओ (RO) मशीनें खराब हैं, उन्हें तुरंत ठीक करवाने और नए पॉइंट्स पर मशीनें लगवाने के आदेश दिए।
परिजनों का फीडबैक: दवाओं की कमी और खराब व्यवहार
वार्डों में निरीक्षण के दौरान जब कलेक्टर ने भर्ती बच्चों के परिजनों से बातचीत की, तो कई गंभीर कमियां सामने आईं:
- दवाइयों की किल्लत: परिजनों ने शिकायत की कि दवा काउंटरों पर अक्सर दवाइयां उपलब्ध नहीं होतीं।
- स्टाफ की मनमानी: मरीजों ने बताया कि काउंटर पर दवाइयां मौजूद होने के बावजूद स्टाफ कई बार उन्हें बिना दवाई दिए ही लौटा देता है।
- दुर्व्यवहार: परिजनों ने अस्पताल के कुछ स्टाफ सदस्यों के खराब और असहयोगपूर्ण व्यवहार के प्रति नाराजगी जताई।
अधीक्षक को निर्देश: लापरवाही पर होगा सख्त एक्शन
जनता से मिले इस फीडबैक के बाद कलेक्टर संदेश नायक ने अधीक्षक को सख्त हिदायत दी:
- दवा उपलब्धता: काउंटरों पर जीवन रक्षक और सामान्य दवाइयों की उपलब्धता तुरंत बढ़ाई जाए।
- अनुशासनात्मक कार्रवाई: मरीजों के उपचार में कोताही बरतने या उनके साथ दुर्व्यवहार करने वाले स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
- शून्य लापरवाही: बच्चों के उपचार के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।