राजस्थान के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार मामला उनके उदयपुर प्रेम और वहां की यात्राओं से जुड़ा है। आरोप है कि राज्यपाल अपने पद का उपयोग कर लगातार उदयपुर के दौरे कर रहे हैं, जिससे सरकारी तंत्र पर अनावश्यक बोझ बढ़ रहा है। इस 'उदयपुर मोह' को लेकर सियासी गलियारों में बहस छिड़ गई है।
विपक्ष और कई स्थानीय संगठनों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचाई है। शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को किसी विशेष शहर के प्रति अत्यधिक लगाव नहीं रखना चाहिए और सरकारी संसाधनों का उपयोग प्रोटोकॉल के दायरे में ही होना चाहिए।
इस शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है। हालांकि, राज्यपाल कार्यालय की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। लोग अब यह जानना चाह रहे हैं कि क्या वाकई इस दौरे में कोई अनियमिता हुई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि गुलाबचंद कटारिया का उदयपुर से पुराना और गहरा जुड़ाव रहा है, जिसे वे मुख्यमंत्री या अन्य बड़े पदों पर रहते हुए भी निभाते रहे हैं। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार की ओर से इस शिकायत पर क्या रुख अपनाया जाता है और क्या राज्यपाल अपने दौरों की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव करते हैं या नहीं।