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पहले नाबालिग को सफाईकर्मी पद पर नियुक्ति दी, फिर हटाया: हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश रद्द किया, कहा-नियोक्ता की जिम्मेदारी

Himanshu Meena 20 Apr, 2026 2 min read
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हाल ही में सामने आए एक महत्वपूर्ण मामले में, एक सरकारी विभाग द्वारा पहले एक नाबालिग को सफाईकर्मी के पद पर नियुक्त किया गया और बाद में उसे नौकरी से हटा दिया गया। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए मामला हाईकोर्ट पहुँचा। अदालत ने पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि किसी को नौकरी देते समय उसके आयु प्रमाण-पत्र की ठीक से जांच नहीं की गई, तो इसके लिए पूरी तरह से नियोक्ता जिम्मेदार है। अदालत के अनुसार, किसी व्यक्ति को नौकरी देने के बाद उसे आधारहीन कारणों से हटाना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन भी है।

न्यायालय ने बर्खास्तगी के आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। जज ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति के समय अधिकारियों की ओर से हुई लापरवाही का खामियाजा कर्मचारी को भुगतने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अदालत ने विभाग को आदेश दिया कि वह कर्मचारी को सेवा में बहाल करने पर विचार करे और नियमों के अनुसार उचित प्रक्रिया अपनाए।

यह निर्णय सरकारी भर्तियों में सतर्कता बरतने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उन युवाओं को राहत मिलेगी जो सरकारी तंत्र की गलती के कारण अपनी नौकरी खो देते हैं। भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए संबंधित विभागों को नियुक्ति के दौरान दस्तावेज सत्यापन में अधिक पारदर्शिता लाने की सलाह दी गई है।

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