Politics

राजस्थान में राजनीतिक दलों को मिला करोड़ों का चंदा

Himanshu Meena 28 Mar, 2026 4 min read
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हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे का बड़ा हिस्सा बड़े व्यापारिक घरानों से आया है। भाजपा को जहां 87 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ, वहीं कांग्रेस के खाते में 25 करोड़ रुपये की राशि आई। राजनीतिक फंडिंग के इस पारदर्शी आंकड़े ने चुनावी चंदे की राजनीति को फिर से चर्चा में ला दिया है।

आंकड़ों पर गौर करें तो अकेले बिजनेस घरानों ने कुल 69 करोड़ रुपये का चंदा दिया है, जो कुल प्राप्त राशि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कॉर्पोरेट घरानों की यह सक्रियता राजनीतिक दलों के प्रति उनके बढ़ते झुकाव और भविष्य की नीतियों को प्रभावित करने की संभावनाओं को दर्शाती है। चंदे के इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि चुनावी खर्चों के लिए राजनीतिक दल पूरी तरह से उद्योगपतियों पर निर्भर हैं।

चुनाव आयोग के पास जमा कराए गए दस्तावेजों के मुताबिक, चंदा देने वाली कंपनियों में कई नामचीन नाम शामिल हैं। दान देने का यह सिलसिला यह भी बताता है कि कंपनियां राजनीतिक स्थिरता और अपने व्यावसायिक हितों के लिए पार्टियों को फंड देना एक निवेश की तरह देखती हैं। छोटे स्तर के दान की तुलना में कॉरपोरेट चंदा राजनीतिक समीकरणों को बड़े स्तर पर बदलने की क्षमता रखता है।

राजस्थान की राजनीति में चंदे का यह खेल भविष्य में चुनावी सुधारों पर बहस को और तेज कर सकता है। हालांकि, यह डेटा राजनीतिक दलों की आर्थिक मजबूती को तो दिखाता है, लेकिन साथ ही चुनावी फंडिंग की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है। जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर इन करोड़ों के चंदे के बदले कॉर्पोरेट घरानों की अपेक्षाएं क्या हैं और पार्टियां किस प्रकार उनका प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

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