जयपुर। राजस्थान के सबसे बड़े अस्पताल, सवाई मानसिंह (SMS) में एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है। अस्पताल के कुल 65 मंत्रालयिक कर्मचारियों में से 38 (करीब 58%) की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगा दी गई है। इतनी बड़ी संख्या में स्टाफ के अचानक चले जाने से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है, जिसके बाद मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर ने इस आदेश को निरस्त करने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा है।

इन महत्वपूर्ण सेवाओं पर मंडराया संकट
अस्पताल अधीक्षक के अनुसार, यदि ये 38 कर्मचारी जनगणना ड्यूटी पर जाते हैं, तो मरीजों से जुड़ी कई आवश्यक योजनाएं और सरकारी कार्य पूरी तरह ठप हो सकते हैं:
- सरकारी योजनाएं: RGHS, मां योजना, मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना और निरोगी राजस्थान।
- जरूरी बोर्ड: मेडिकल बोर्ड और दिव्यांगता प्रमाणन (Disability Certification) कार्य।
- प्रोटोकॉल: वीवीआईपी (VVIP) विजिट और कोर्ट के आदेशों के तहत होने वाले स्वास्थ्य परीक्षण।
- दैनिक कार्य: महत्वपूर्ण फाइलों का संचालन और दिशा-निर्देश जारी करने जैसे प्रशासनिक काम।
नियमों की अनदेखी का आरोप
हैरानी की बात यह है कि 29 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन मुख्य सचिव ने स्पष्ट आदेश जारी किए थे कि अस्पतालों के मंत्रालयिक, लेखा और आईटी स्टाफ को चुनाव या जनगणना जैसे कार्यों से मुक्त रखा जाए। इसके बावजूद, नगर निगम (आदर्श नगर जोन) ने इन नियमों को दरकिनार करते हुए आदेश जारी कर दिए।
कमिश्नर का दखल: ड्यूटी रद्द करने की सिफारिश
मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर ने जयपुर कलेक्टर को कड़ा पत्र लिखकर मांग की है कि:
- इन सभी 38 कर्मचारियों की जनगणना ड्यूटी तत्काल निरस्त की जाए।
- भविष्य में भी अस्पताल के स्टाफ को ऐसे गैर-चिकित्सीय कार्यों से दूर रखा जाए ताकि मरीजों की सेवा में कोई बाधा न आए।
फैक्ट फाइल: SMS अस्पताल का प्रशासनिक गणित
- कुल मंत्रालयिक कर्मचारी: 65
- जनगणना में लगाए गए कर्मचारी: 38
- प्रभावित कार्य क्षमता: लगभग 60% स्टाफ कम हो जाएगा।
- आदेश जारी करने वाली अथॉरिटी: उपायुक्त, आदर्श नगर जोन (नगर निगम)।