झुंझुनूं (राजस्थान)। शेखावाटी की राजनीति के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा के छोटे भाई संजय सिंह उर्फ संजय गुढ़ा की फरारी आखिरकार खत्म हुई। झुंझुनूं की गुढ़ागौड़जी थाना पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 2018 के चर्चित थाना पथराव और हिंसा मामले में फरार चल रहे तीन मुख्य इनामी आरोपियों को धर दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों में पूर्व मंत्री के भाई के अलावा दो अन्य साथी भी शामिल हैं, जिन पर पुलिस ने इनाम घोषित कर रखा था।

फरारी का अंत: मुखबिर की सूचना पर पुलिस की दबिश
थानाधिकारी सुरेश रोलन की टीम ने तकनीकी सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से तीनों इनामी आरोपियों को गिरफ्तार किया:
- संजय सिंह उर्फ संजय गुढ़ा (पूर्व मंत्री का भाई)
- मोहम्मद जावेद (निवासी छावसरी)
- धर्मेन्द्र सिंह उर्फ कुकी (निवासी हुकमपुरा)इन तीनों पर पुलिस ने 2-2 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। गिरफ्तारी के बाद इन्हें तुरंत न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से इन्हें जेल भेज दिया गया है।
13 अप्रैल का फैसला और संजय गुढ़ा की चूक
इस मामले का एक महत्वपूर्ण मोड़ 13 अप्रैल 2026 को आया था, जब अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश ने मुख्य फैसला सुनाया था:
- 39 आरोपी बरी: कोर्ट ने सबूतों के अभाव में नामजद 39 आरोपियों को दोषमुक्त (बरी) कर दिया था। कोर्ट ने माना कि पुलिस ठोस सबूत पेश करने में विफल रही।
- ट्रायल से गायब: जिस समय यह फैसला आया, संजय गुढ़ा और उनके दो साथी फरार थे। यदि वे उस समय कोर्ट में मौजूद होते, तो संभवतः वे भी अन्य साथियों के साथ बरी हो सकते थे, लेकिन फरार होने के कारण उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी रही।
घटनाक्रम: 3 अगस्त 2018 की वो हिंसक रात (Background Info)
यह मामला 6 साल पुराना है और पुलिस बनाम ग्रामीणों के संघर्ष की एक बड़ी मिसाल है:
- युवती का अपहरण: 3 अगस्त 2018 को एक युवती के अपहरण का मामला दर्ज हुआ था। पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट ग्रामीण आक्रोशित थे।
- थाने पर हमला: 14 अगस्त 2018 को सैकड़ों ग्रामीणों ने गुढ़ागौड़जी थाने का घेराव किया। भीड़ उग्र हुई और पथराव शुरू कर दिया।
- पुलिसकर्मी घायल: इस हिंसा में तत्कालीन थानाधिकारी अशोक कुमार और कांस्टेबल नरेश कुमार गंभीर रूप से घायल हुए थे। उपद्रवियों ने थाने का फर्नीचर तोड़ा, सरकारी फाइलें फाड़ दीं और गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया था।

हाइपर-लोकल इम्पैक्ट: गुढ़ा की राजनीति पर असर (Analysis)
पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा के भाई की गिरफ्तारी झुंझुनूं की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकती है।
- राजनीतिक छवि: संजय गुढ़ा पर भीड़ को उकसाने और हिंसा का नेतृत्व करने का गंभीर आरोप है।
- न्यायिक पेच: अब जबकि मुख्य मामले में 39 लोग बरी हो चुके हैं, संजय गुढ़ा के वकील इसी आधार पर उनकी जमानत और बरी होने की दलील दे सकते हैं। हालांकि, ‘फरारी’ और ‘इनामी’ होने का टैग उनके केस को कमजोर कर सकता है।
मामले का संक्षिप्त विवरण (Quick Facts Table)
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| मामला | गुढ़ागौड़जी थाना पथराव व हिंसा (2018) |
| मुख्य आरोपी | संजय सिंह उर्फ संजय गुढ़ा |
| इनामी राशि | ₹2,000 प्रति आरोपी |
| कोर्ट का हालिया एक्शन | तीनों आरोपियों को जेल भेजा गया |
| पूर्व का फैसला | 39 आरोपी सबूतों के अभाव में बरी |
Smart FAQ Section: फरार अपराधियों और अदालती प्रक्रिया पर सवाल
1. अगर 39 लोग बरी हो गए, तो क्या संजय गुढ़ा भी बरी हो जाएंगे?
कानूनी तौर पर हर आरोपी का ट्रायल अलग तथ्यों पर आधारित हो सकता है। चूंकि संजय गुढ़ा फरार थे, इसलिए उनका ट्रायल अब शुरू होगा। हालांकि, सह-आरोपियों का बरी होना उनके पक्ष में एक मजबूत आधार बन सकता है।
2. पुलिस ने इनाम क्यों घोषित किया था?
जब कोई आरोपी बार-बार समन भेजने के बाद भी कोर्ट में पेश नहीं होता और लंबे समय तक छिपकर रहता है, तो पुलिस उसे ‘भगोड़ा’ घोषित कर इनाम रखती है।
3. इस केस में 3 आरोपियों की मृत्यु क्यों दिखाई गई है?
यह मामला 2018 से चल रहा है। 7 साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान 3 आरोपियों की प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो गई थी।
Editor’s Note: देर है, पर अंधेर नहीं
निष्कर्ष: गुढ़ागौड़जी की यह घटना याद दिलाती है कि भीड़ की हिंसा का अंत कभी सुखद नहीं होता। पूर्व मंत्री के भाई की गिरफ्तारी यह संदेश देती है कि कानून की पहुंच से कोई भी रसूखदार व्यक्ति बच नहीं सकता। हालांकि, पुलिस के लिए यह आत्ममंथन का भी विषय है कि 39 आरोपी सबूतों के अभाव में बरी हो गए—क्या जांच में कोई कमी रह गई थी? अब सबकी नज़रें संजय गुढ़ा के आगामी ट्रायल पर टिकी हैं।