भरतपुर। प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में राजस्थान सरकार ने एक क्रांतिकारी निर्णय लिया है। अब भरतपुर सहित प्रदेश भर के वाहन मालिक अपनी पुरानी पेट्रोल और डीजल गाड़ियों को ‘ई-व्हीकल’ (Electric Vehicle) में बदल सकेंगे। परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग ने पुराने वाहनों में इलेक्ट्रिक रेट्रोफिटमेंट किट (Electric Retrofitment Kit) लगवाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ उन वाहन स्वामियों को मिलेगा जिनकी गाड़ियां 10 या 15 साल की समय सीमा पूरी कर चुकी हैं।

10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को राहत
एनसीआर क्षेत्र में आने के कारण भरतपुर में पुराने वाहनों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियम सख्ती से लागू हैं। अब तक नियम यह था कि 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को अनिवार्य रूप से डी-रजिस्टर्ड (पंजीकरण रद्द) कर दिया जाता था। वर्ष 2025 में करीब 19,824 और 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही 4,103 वाहन सड़कों से बाहर हो चुके हैं। लेकिन अब नई नीति के तहत, यदि वाहन मालिक अपनी गाड़ी में मान्यता प्राप्त इलेक्ट्रिक किट लगवा लेता है, तो उसकी गाड़ी को डी-रजिस्टर्ड नहीं किया जाएगा, बल्कि उसे इलेक्ट्रिक वाहन के रूप में नया जीवन मिल सकेगा।
अनुमति और प्रक्रिया: नियम तोड़ना पड़ेगा भारी
जिला परिवहन अधिकारी अभय मुदगल के अनुसार, वाहन में किसी भी तरह का ईंधन परिवर्तन (Conversion) कराने से पहले मोटर वाहन अधिनियम की धारा 52 के तहत पंजीयन प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
- अनिवार्य इंद्राज: किट लगवाने के 14 दिनों के भीतर वाहन की आरसी (RC) में इस बदलाव का इंद्राज कराना होगा।
- मान्यता प्राप्त किट: केवल वही किट इस्तेमाल की जा सकेंगी जिन्हें ARAI या ICAT जैसी केंद्रीय एजेंसियों से ‘टाइप अप्रूवल’ मिला हो।
- अधिकृत केंद्र: फिटमेंट केवल उन्हीं वर्कशॉप पर होगा जिन्हें परिवहन विभाग ने अधिकृत किया है।
रेट्रोफिटमेंट सेंटर्स के लिए कड़े मानक
सरकार ने वर्कशॉप संचालकों के लिए भी सुरक्षा मानकों को कड़ा रखा है। सेंटर का क्षेत्रफल कम से कम 450 वर्ग फुट होना चाहिए, जहाँ अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों। साथ ही, वहाँ कम से कम एक आईटीआई (ITI) प्रशिक्षित तकनीशियन होना अनिवार्य है।
आंकड़ों में डी-रजिस्ट्रेशन की मार (वर्ष 2026)
भरतपुर में पुराने वाहनों पर सख्ती का अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है:
- डीजल वाहन (10 साल पुराने): जनवरी से मार्च 2026 के बीच कुल 691 गाड़ियां बाहर हुईं।
- पेट्रोल वाहन (15 साल पुराने): इसी अवधि में कुल 3412 वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया।
सरकार की इस नई पहल से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि मध्यम वर्ग के लोगों को अपनी पुरानी गाड़ियों को कबाड़ में बेचने के आर्थिक नुकसान से भी राहत मिलेगी।