सीकर (राजस्थान)। शेखावाटी की वीर प्रसूता धरा ने अपना एक और सपूत मां भारती की सेवा में समर्पित कर दिया है। सीकर जिले के खाटूश्यामजी क्षेत्र के सांवलपुरा गांव निवासी BSF जवान सुल्तान सिंह नटवाड़िया का गुजरात के गांधीधाम में ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से निधन हो गया। इस दुखद खबर के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है, वहीं अपने लाड़ले को अंतिम विदाई देने के लिए ग्रामीणों और व्यापारियों ने सम्मान की एक अनूठी मिसाल पेश की है।

कर्तव्य पथ पर थमी सांसें: गांधीधाम में तैनात थे सुल्तान सिंह
सुल्तान सिंह नटवाड़िया सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 90वीं बटालियन में कार्यरत थे और वर्तमान में गुजरात के गांधीधाम में अपनी सेवाएं दे रहे थे। ड्यूटी के दौरान अचानक आए हार्ट अटैक ने इस जांबाज योद्धा को हमसे छीन लिया। उनके निधन की सूचना जैसे ही सांवलपुरा पहुंची, गांव का हर चूल्हा ठंडा पड़ गया और लोग उनके निवास की ओर उमड़ पड़े।
सम्मान में झुका बाजार: व्यापारियों ने स्वैच्छिक रूप से बंद रखीं दुकानें
सीकर के लोगों का सेना और अर्धसैनिक बलों के प्रति अटूट सम्मान एक बार फिर धरातल पर दिखा।
- स्वैच्छिक बंद: शहीद सुल्तान सिंह के सम्मान में खाटूश्यामजी और सांवलपुरा क्षेत्र के व्यापारियों ने अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखीं।
- भावुक माहौल: व्यापारियों का कहना है कि सुल्तान सिंह केवल एक जवान नहीं, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के मार्गदर्शक थे, जो छुट्टी पर आने पर हर किसी को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करते थे।
कल निकलेगी भव्य तिरंगा यात्रा: अलोदा से सांवलपुरा तक ‘शहीद’ को नमन
प्रशासन और पूर्व सैनिक संगठनों ने शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए विशेष तैयारियां की हैं:
- रैली का समय: गुरुवार सुबह 9:00 बजे।
- रूट: अलोदा सदर थाने से शुरू होकर यह तिरंगा यात्रा शहीद के पैतृक गांव सांवलपुरा तक पहुंचेगी।
- प्रतिभाग: इस यात्रा में हजारों की संख्या में ग्रामीण, बाइक सवार युवा, प्रशासनिक अधिकारी और पूर्व सैनिक शामिल होंगे।
लोकल इम्पैक्ट: युवाओं के ‘रोल मॉडल’ थे सुल्तान सिंह (Analysis)
सीकर जिला देश में सबसे ज्यादा सैनिक देने वाले जिलों में शुमार है। सुल्तान सिंह नटवाड़िया जैसे जवान जब गांव आते थे, तो वे स्थानीय खेल मैदानों में युवाओं को दौड़ने और शारीरिक दक्षता बढ़ाने के गुर सिखाते थे। उनकी कमी न केवल परिवार बल्कि उन सैकड़ों युवाओं को खलेगी जो उन्हें देखकर वर्दी पहनने का सपना बुनते थे।
शहीद सुल्तान सिंह नटवाड़िया: एक नज़र में (Data Points)
| विवरण | जानकारी |
| नाम | सुल्तान सिंह नटवाड़िया |
| यूनिट | 90वीं बटालियन, BSF |
| तैनाती स्थल | गांधीधाम, गुजरात |
| पैतृक गांव | सांवलपुरा, खाटूश्यामजी (सीकर) |
| अंतिम संस्कार | गुरुवार को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ के साथ |
Smart FAQ Section: शहीद और उनके परिवार से जुड़े सवाल
1. ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से मौत को ‘शहादत’ की श्रेणी में क्यों रखा जाता है?
जब कोई जवान ऑन-ड्यूटी होता है और विपरीत परिस्थितियों या कार्य के दबाव के बीच उसका निधन होता है, तो उसे ‘बैटल कैजुअल्टी’ या सेवा के दौरान सर्वोच्च बलिदान माना जाता है और पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाता है।
2. कल की तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए क्या निर्देश हैं?
प्रशासन ने अपील की है कि यात्रा के दौरान अनुशासन बनाए रखें और देशभक्ति के नारों के साथ शहीद को सम्मान दें। यातायात सुचारू रखने के लिए अलोदा रूट पर पुलिस तैनात रहेगी।
3. परिवार को क्या सहायता मिलती है?
BSF के नियमों और राज्य सरकार की शहीद कल्याण योजनाओं के तहत परिवार को पेंशन, अनुग्रह राशि और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
Editor’s Note: वर्दी का सम्मान, सीकर की पहचान
निष्कर्ष: सुल्तान सिंह नटवाड़िया का जाना सीकर के लिए एक बड़ी क्षति है। पिता हरलाल सिंह नटवाड़िया की आंखों में आंसू तो हैं, लेकिन सीना गर्व से चौड़ा है कि उनके बेटे ने अंतिम सांस तक देश की सेवा की। ‘अपना राजस्थान न्यूज़’ इस वीर योद्धा को कोटि-कोटि नमन करता है। कल की तिरंगा यात्रा यह साबित करेगी कि शेखावाटी अपने नायकों को कभी नहीं भूलती।