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जयपुर में प्रदेश का पहला ‘लैरिंगोलॉजी कॉन्क्लेव’: अब आवाज के लकवे का होगा सटीक इलाज; लाइव सर्जरी ट्रेनिंग से निखरेंगे राजस्थान के युवा डॉक्टर्स

जयपुर (राजस्थान)। गुलाबी नगरी जयपुर अब चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में एक नए अध्याय की साक्षी बनी है। प्रदेश में पहली बार केवल ‘लैरिंक्स’ (आवाज के अंग) पर केंद्रित एक विशेष दो-दिवसीय भव्य कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कॉन्क्लेव में राजस्थान के कोने-कोने से आए लगभग 150 ईएनटी (ENT) विशेषज्ञों और स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट्स ने हिस्सा लिया, ताकि गले और आवाज से जुड़ी जटिल बीमारियों के उपचार में आधुनिकता लाई जा सके।

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जयपुर में प्रदेश का पहला 'लैरिंगोलॉजी कॉन्क्लेव': अब आवाज के लकवे का होगा सटीक इलाज; लाइव सर्जरी ट्रेनिंग से निखरेंगे राजस्थान के युवा डॉक्टर्स 3

वोकल कॉर्ड पैरालिसिस: जब आवाज पर लग जाता है ‘लकवा’

कॉन्फ्रेंस का मुख्य केंद्र बिंदु ‘बोलने के बाद होने वाले लकवे’ (वोकल कॉर्ड पैरालिसिस) का उपचार रहा。 विशेषज्ञों ने चर्चा की कि कैसे आधुनिक मेडिकल साइंस के जरिए अब आवाज खो चुके मरीजों को दोबारा बोलने के काबिल बनाया जा सकता है।

  • आधुनिक तकनीकें: उपचार के लिए लेज़र (Laser), कोब्लेटर (Coblator) और स्ट्रोबोस्कोपी (Stroboscopy) जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिए गए।
  • गले की अन्य समस्याएं: कॉन्क्लेव में गले के संक्रमण, निगलने में आने वाली कठिनाइयाँ (Dysphagia) और FEES जांच की उपयोगिता पर भी गहन मंथन हुआ।

लाइव कैडावेरिक डिसेक्शन: युवा सर्जन्स के लिए वरदान (Investigative Analysis)

इस पूरी कॉन्फ्रेंस का सबसे प्रमुख आकर्षण “लाइव कैडावेरिक डिसेक्शन” रहा। एसएमएस (SMS) मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग के सहयोग से आयोजित इस सत्र में:

  1. युवा ईएनटी सर्जन्स को मानव शरीर के अंगों (कैडावर) पर लैरिंक्स की जटिल सर्जरी का व्यावहारिक प्रशिक्षण (Hands-on Training) दिया गया।
  2. विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे सूक्ष्म सर्जरी के दौरान आवाज की नसों को सुरक्षित रखा जाता है।
  3. इस तरह का प्रशिक्षण राजस्थान में मेडिकल टूरिज्म और जटिल ऑपरेशन्स की सफलता दर को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा।
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जयपुर में प्रदेश का पहला 'लैरिंगोलॉजी कॉन्क्लेव': अब आवाज के लकवे का होगा सटीक इलाज; लाइव सर्जरी ट्रेनिंग से निखरेंगे राजस्थान के युवा डॉक्टर्स 4

हाइपर-लोकल इम्पैक्ट: जयपुर और सीकर के मरीजों को सीधा फायदा

जयपुर संभाग, विशेषकर जयपुर और सीकर के मरीजों के लिए यह कॉन्क्लेव बड़ी राहत लेकर आया है। अब स्थानीय स्तर पर ही ऐसे डॉक्टर तैयार होंगे जो बिना गला काटे लेज़र तकनीक से आवाज के ट्यूमर और लकवे का इलाज कर सकेंगे। इससे मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

आयोजक मंडल और विशिष्ट अतिथि (Team Behind the Event)

इस सफल आयोजन की कमान प्रदेश के दिग्गज चिकित्सकों के हाथों में रही:

  • मुख्य अतिथि: डॉ. रेखा हर्षवर्धन (एचओडी, ईएनटी विभाग, एसएमएस मेडिकल कॉलेज)।
  • चेयरपर्सन: डॉ. मोहनीश ग्रोवर।
  • साइंटिफिक चेयरपर्सन: डॉ. राघव मेहता।
  • आयोजन सचिव: डॉ. मनीषा शर्मा, डॉ. पलक दीवान और डॉ. पायल कुंभट।

Smart FAQ Section: आवाज की सेहत से जुड़े सवाल

1. वोकल कॉर्ड पैरालिसिस क्या है? यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें आवाज निकालने वाली नसों में लकवा मार जाता है, जिससे आवाज पूरी तरह बंद हो सकती है या बहुत धीमी और भारी हो जाती है।

2. क्या बिना चीर-फाड़ के गले का इलाज संभव है? हाँ, कॉन्फ्रेंस में चर्चा की गई ‘लेज़र’ और ‘कोब्लेटर’ तकनीक के जरिए अब गले के अंदर बिना कोई बड़ा चीरा लगाए जटिल सर्जरी की जा सकती है।

3. निगलने में समस्या (Dysphagia) होने पर क्या करें? इसे हल्के में न लें, यह किसी न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत हो सकता है। कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने ऐसी समस्याओं के लिए FEES जांच को बेहद प्रभावी बताया है।

Editor’s Note: डिजिटल हेल्थ की ओर बढ़ता राजस्थान

निष्कर्ष: जयपुर में आयोजित यह लैरिंगोलॉजी कॉन्क्लेव यह साबित करता है कि राजस्थान का चिकित्सा तंत्र अब केवल सामान्य उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि विशिष्ट अंगों (Organ-specific) की जटिल सर्जरी में भी महारत हासिल कर रहा है। 150 विशेषज्ञों का एक छत के नीचे जुटना और आधुनिक तकनीकों को साझा करना भविष्य में ‘आवाज के रोगों’ के इलाज की लागत को कम करेगा और सफलता की दर को बढ़ाएगा।

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