जयपुर। राजस्थान में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुँचने के साथ ही प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, एसएमएस (SMS) में सुरक्षा और चिकित्सा इंतजामों को अपग्रेड किया गया है। गर्मियों के मौसम में अस्पतालों में बढ़ती शॉर्ट-सर्किट और आगजनी की घटनाओं को देखते हुए आज अस्पताल परिसर में फायर सेफ्टी ट्रेनिंग का आयोजन किया गया। इसके साथ ही हीटवेव (लू) के मरीजों के लिए विशेष वार्ड भी तैयार किए गए हैं।

स्टाफ को सिखाया ‘लाइफ सेविंग’ मंत्र
नगर निगम के फायर अधिकारियों की मौजूदगी में अस्पताल के मेन पोर्च के बाहर नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षा गार्डों को विशेष ट्रेनिंग दी गई। फायर ऑफिसर ने बताया कि गर्मियों में एसी, कूलर और पंखों के अत्यधिक उपयोग से बिजली की वायरिंग पर लोड बढ़ जाता है, जो अक्सर शॉर्ट-सर्किट और आगजनी का कारण बनता है।
- उपकरणों की जांच: ट्रेनिंग के दौरान अस्पताल में लगे फायर एक्सटिंगुइशर सिलेंडरों और अन्य अग्निशमन उपकरणों की टेस्टिंग की गई।
- प्राथमिक नियंत्रण: स्टाफ को बताया गया कि यदि आग छोटी है, तो उसे प्राथमिक स्तर पर ही सिलेंडरों की मदद से कैसे नियंत्रित किया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।
हीटवेव के लिए 17 बेड का विशेष वार्ड
लू की चपेट में आने वाले मरीजों के तत्काल उपचार के लिए अस्पताल की साउथ विंग के बेसमेंट में 17 बेड रिजर्व किए गए हैं।
- व्यवस्था: इन 17 बेडों में 10 सामान्य बेड, 5 आईसीयू बेड और 2 डीई-आईसीयू बेड शामिल हैं।
- विशेषज्ञ टीम: इसकी निगरानी के लिए मेडिसिन विभाग के दो वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है। डॉ. श्रीकांत शर्मा को नोडल ऑफिसर नियुक्त किया गया है, जबकि डॉ. हंसराज पहाड़िया उनके सहायक के रूप में कार्य करेंगे।
मरीजों को गर्मी से राहत: कूलर और आरओ की व्यवस्था
अस्पताल प्रशासन ने मरीजों और उनके परिजनों को भीषण तपिश से बचाने के लिए सभी वार्डों और कॉमन एरिया में कूलर व पंखे लगवा दिए हैं। गंभीर मरीजों के लिए आईसीयू वार्डों में एसी की सुविधा सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही, अस्पताल के विभिन्न प्रवेश द्वारों और वार्डों के पास ठंडे पानी के लिए नए वाटर कूलर और आरओ (RO) सिस्टम लगाए गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि इन इंतजामों का उद्देश्य न केवल चिकित्सा सुविधा देना है, बल्कि अस्पताल के भीतर सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करना भी है ताकि आपात स्थिति में जान-माल का नुकसान न हो।