जयपुर। राजस्थान की राजधानी में कनिष्ठ लिपिक (LDC) भर्ती-2013 को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। तत्कालीन एडीएम (तृतीय) कुंतल विश्नोई की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में बताया है कि जयपुर जिला परिषद में वर्ष 2013 से 2019 तक का भर्ती रिकॉर्ड, नोटशीट और मेरिट लिस्ट गायब है। आशंका जताई जा रही है कि फर्जीवाड़े के सबूत मिटाने के लिए जिम्मेदारों ने जानबूझकर रिकॉर्ड को नष्ट या खुर्द-बुर्द कर दिया है।

जांच में खुले धांधली के ‘पन्ने’
कमेटी ने कुल 627 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की पड़ताल की, जिसमें से 145 अभ्यर्थी ऐसे मिले जिनके कागजात पूरी तरह संदिग्ध या फर्जी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती शाखा के बाबू और प्रभारी अधिकारियों ने मिलीभगत कर इन फर्जी दस्तावेजों को न केवल स्वीकार किया, बल्कि नियुक्तियां भी सुनिश्चित कीं।
फर्जीवाड़े के 5 बड़े तरीके:
- एक साथ दो जगह उपस्थिति: दर्जनों अभ्यर्थियों ने एक ही समय में राजस्थान में संविदा पर नौकरी करने का अनुभव प्रमाण पत्र लगाया और उसी दौरान दूसरे राज्यों से नियमित (Regular) डिग्री हासिल करना दिखाया।
- अवैध यूनिवर्सिटी की डिग्रियां: मेघालय, सिक्किम, एमपी और गुजरात की उन ऑफ-कैंपस यूनिवर्सिटीज की डिग्रियों को आधार बनाया गया, जिन्हें सरकार पहले ही अवैध घोषित कर चुकी है।
- बोनस अंकों का खेल: अपात्र होने के बावजूद कई चहेते अभ्यर्थियों को 10 से 30 बोनस अंक दे दिए गए। अनुभव प्रमाण पत्र भी नियम विरुद्ध जारी किए गए।
- फर्जी कंप्यूटर सर्टिफिकेट: कई नियुक्तियां ऐसे RS-CIT कोड पर हुईं, जिनका रिकॉर्ड वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) में मौजूद ही नहीं है।
- कोटा उल्लंघन: दिव्यांग और भूतपूर्व सैनिक कोटे में भी नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां दी गईं। कई महिला अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में बाल विवाह की जानकारी भी छिपाई गई।
एसीबी कार्रवाई और विभागीय चुप्पी
इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत नितेश टाटीवाल, मुकेश शर्मा और संदीप वर्मा सहित कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मांगी गई है। हालांकि, विभाग स्तर पर यह अनुमति लंबे समय से लंबित है, जिससे दोषियों को बचाने के आरोप लग रहे हैं।
पंचायत समितियों में खलबली
कमेटी को जिले की विभिन्न पंचायत समितियों से फाइलें मिली हैं, जिनमें सबसे अधिक संदिग्ध फाइलें गोविंदगढ़ (51), कोटपूतली (37), शाहपुरा (35) और जमवारामगढ़ (35) से सामने आई हैं। अब कलेक्टर के निर्देश पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।