अक्षय तृतीया का दिन पूरे भारत में मांगलिक कार्यों और शादियों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा में स्थिति कुछ अलग रही। यहाँ के स्थानीय निवासियों ने वर्षों से चली आ रही एक अनूठी परंपरा का पालन करते हुए इस दिन कोई भी मांगलिक कार्य संपन्न नहीं किया।
इस परंपरा के पीछे की मान्यताओं के अनुसार, बरवाड़ा के लोग अक्षय तृतीया के दिन अपने कुल देवी चौथ माता के प्रति विशेष श्रद्धा प्रकट करते हैं। इस दिन गांव में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य न करके लोग माता के प्रति अपनी कृतज्ञता और आस्था व्यक्त करते हैं, जिसे सदियों से निभाया जा रहा है।
चौथ माता मंदिर में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। गांव के लोग पारंपरिक वेशभूषा में मंदिर पहुंचे और माता का आशीर्वाद लिया। मंदिर की घंटियों की गूंज से पूरा परिसर भक्तिमय हो गया, लेकिन गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा क्योंकि लोग अपनी परंपरा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध थे।
यह परंपरा न केवल एक सामाजिक नियम है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। आधुनिकता के इस दौर में भी यहां के लोगों का अपनी पुरानी मान्यताओं और रीति-रिवाजों के प्रति अटूट विश्वास यह दर्शाता है कि कैसे आस्था के जरिए एक समुदाय अपनी पहचान को अक्षुण्ण बनाए हुए है।