राजस्थान के जालौर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक परिवार को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। मामला तब तूल पकड़ गया जब परिवार के सदस्यों ने अपनी मर्जी से एक शादी समारोह में भाग लिया, जिसे पंचायत ने अपनी परंपराओं के विरुद्ध माना। इस कदम से नाराज होकर गांव के पंचों ने परिवार को समाज से बाहर करने का फरमान सुना दिया।
पंचों ने न केवल परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया, बल्कि उन पर लाखों रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी ठोक दिया। इतना ही नहीं, फरमान में यह भी कहा गया है कि यदि कोई भी ग्रामीण इस पीड़ित परिवार से कोई संबंध रखेगा, तो उसे भी भारी दंड का सामना करना पड़ेगा। इस तुगलकी फरमान के कारण परिवार पिछले कुछ दिनों से अत्यधिक मानसिक तनाव और भय के साये में जीने को मजबूर है।
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि पंचों ने उन्हें डराने-धमकाने के लिए उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया है। इस बहिष्कार के चलते परिवार का रोजमर्रा का जीवन दूभर हो गया है और गांव में कोई भी व्यक्ति उनसे बात करने या उनकी मदद करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर आधुनिक युग में इस तरह की कुप्रथाएं अभी भी कैसे प्रभावी हैं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए अब पीड़ित परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है और पुलिस में मामला दर्ज करने की तैयारी की है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। यह घटना सामाजिक सरोकारों के नाम पर की जा रही मनमानी और लोगों के मौलिक अधिकारों के हनन का एक बड़ा उदाहरण है, जिसकी चहुंओर निंदा हो रही है।