कृषि विभाग ने उर्वरकों की कालाबाजारी और अवैध बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए एक कड़ा रुख अपना लिया है। हाल ही में आयोजित विक्रेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक में विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उर्वरकों की बिक्री अब पूरी तरह से पारदर्शी होनी चाहिए। इसके लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग प्रणाली को अनिवार्य कर दिया गया है।
बैठक के दौरान यह जोर दिया गया कि प्रत्येक विक्रेता को अपनी इन्वेंट्री और बिक्री का विवरण पोर्टल पर अपडेट करना होगा। विभाग का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से उर्वरकों की जमाखोरी पर रोक लगेगी और किसानों को सही कीमत पर खाद उपलब्ध हो सकेगी। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी स्तर पर हेरफेर को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की गई है। यदि कोई विक्रेता ऑनलाइन रिकॉर्ड में गड़बड़ी करता पाया जाता है या तय कीमत से अधिक दाम वसूलता है, तो उसका लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही कानूनी कार्यवाही के भी निर्देश दिए गए हैं।
कृषि विभाग ने किसानों से भी अपील की है कि वे उर्वरक खरीदते समय रसीद अवश्य लें और यदि उन्हें कहीं कोई अनियमितता दिखे, तो उसकी सूचना तुरंत विभाग को दें। विभाग का लक्ष्य आने वाले कृषि सीजन में उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है ताकि किसानों को बुवाई के समय किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।