राजस्थान के सरकारी स्कूलों में इन दिनों एक अनूठा अभियान चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसके तहत उन विद्यार्थियों के नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू की गई है जो सुनने में अजीब या अपमानजनक लगते हैं। राज्य शिक्षा विभाग ने उन नामों को चिन्हित किया है, जो बच्चों के आत्मविश्वास को कम कर सकते हैं या उनके स्कूल के माहौल पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
इस अभियान के तहत 'कजोड़मल', 'घसीटालाल' और 'भोलाराम' जैसे पारंपरिक लेकिन वर्तमान समय में अजीब माने जाने वाले नामों को बदलकर नए और सार्थक नाम रखे जा रहे हैं। सरकारी शिक्षकों का मानना है कि स्कूल में बच्चों का नाम उनकी पहचान का मुख्य हिस्सा है और यदि नाम के कारण उन्हें हंसी का पात्र बनना पड़ता है, तो इससे उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ता है।
इस प्रक्रिया को पूरी करने के लिए शिक्षा विभाग ने अभिभावकों की सहमति को अनिवार्य बनाया है। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों और उनके माता-पिता के साथ इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ चर्चा करें ताकि बिना किसी दबाव के नाम परिवर्तन की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके। यह बदलाव केवल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को एक बेहतर पहचान देने की कोशिश है।
शिक्षाविदों और मनोवैज्ञानिकों ने इस कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के बच्चों के लिए यह एक सकारात्मक शुरुआत है। नाम बदलने के इस अभियान के माध्यम से स्कूलों में विद्यार्थियों के बीच हो रही मानसिक प्रताड़ना और मजाक को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी, जिससे छात्र अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी शिक्षा पूरी कर सकेंगे।