राजस्थान में किसानों के जारी धरने प्रदर्शन के बीच राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल की अचानक एंट्री ने पूरे प्रशासनिक अमले में खलबली मचा दी। बेनीवाल के वहां पहुंचते ही आंदोलन को एक नई धार मिली और उन्होंने राज्य सरकार को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा।
बेनीवाल ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि किसान अपनी जमीन और हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसे नजरअंदाज करना सरकार के लिए भारी पड़ेगा। उनकी इस 'चेतावनी' के बाद से स्थानीय अधिकारियों और प्रशासन के बीच हड़कंप मच गया और आनन-फानन में उच्च स्तरीय वार्ता का दौर शुरू हुआ।
देर रात तक चली लंबी मैराथन बैठक के बाद, सरकार और किसान नेताओं के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। इसमें फसल खराबे का मुआवजा, बिजली दरों में राहत और कर्ज माफी जैसे प्रमुख विषयों पर प्रशासन ने सकारात्मक आश्वासन दिया है। इस समझौते के बाद धरने पर बैठे किसानों ने राहत की सांस ली है।
हालांकि, किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी वादों को धरातल पर क्रियान्वित नहीं किया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। हनुमान बेनीवाल की सक्रिय भूमिका ने इस बार किसानों की आवाज को सत्ता के गलियारों तक मजबूती से पहुंचाने का काम किया है।