राजस्थान के रहने वाले एक पूर्व सैनिक ने शिक्षा के प्रति अपनी अद्भुत लगन का परिचय देते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने अपने जीवन में एक-दो नहीं, बल्कि कुल 138 डिग्रियां हासिल की हैं, जो अपने आप में एक मिसाल है। उनकी इस शैक्षणिक यात्रा ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है।
इस पूर्व सैनिक ने साबित कर दिया है कि उम्र और परिस्थितियों का शिक्षा की राह में कोई बंधन नहीं होता। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी ज्ञान के प्रति अपनी प्यास को कम नहीं होने दिया। विभिन्न विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करके उन्होंने यह दिखाया है कि दृढ़ संकल्प के साथ कुछ भी हासिल किया जा सकता है।
उनकी इस असाधारण उपलब्धि के कारण उनका नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया है। 138 डिग्रियां प्राप्त करने की उनकी यह उपलब्धि दुनिया भर के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। लोग उनकी बुद्धिमत्ता और निरंतर प्रयास की जमकर सराहना कर रहे हैं।
शिक्षाविदों और समाज के अन्य वर्गों के बीच उनकी यह सफलता चर्चा का विषय बनी हुई है। वे आज के दौर में उन लोगों के लिए एक मार्गदर्शक हैं जो कठिन परिस्थितियों के चलते अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते। उनकी यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि सीखने की कोई निश्चित उम्र नहीं होती।