राजस्थान के छीपाबड़ौद स्थित राजकीय विद्यालयों में शिक्षा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। लंबे समय से शिक्षकों के कई पद रिक्त होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे अभिभावकों में भारी रोष व्याप्त है। स्कूल प्रशासन के अनुसार, बार-बार मांग करने के बावजूद रिक्त पदों को भरने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
शिक्षकों की कमी के कारण मुख्य विषयों की कक्षाएं नियमित रूप से नहीं लग पा रही हैं। इसका सीधा नुकसान बोर्ड कक्षाओं के छात्रों को हो रहा है, जिन्हें परीक्षा की तैयारी में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। कई कक्षाओं में तो महीनों से एक भी शिक्षक नहीं पहुँचा है, जिससे छात्र स्वयं अध्ययन करने को मजबूर हैं।
स्थानीय ग्रामीण और छात्र संगठन इस समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। प्रदर्शनों और ज्ञापनों के माध्यम से भी शिक्षा विभाग को सूचित किया गया है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की इस अनदेखी से शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है, जो भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है।
अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले से अवगत हैं और जल्द ही समायोजन प्रक्रिया के माध्यम से व्यवस्था सुधारने का प्रयास करेंगे। छात्रों के भविष्य को देखते हुए प्रशासन को अब त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता है।