राजस्थान में चिलचिलाती गर्मी की आहट के साथ ही पानी का संकट गहराने लगा है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में जलस्तर गिरने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है, जिसे 'वाटर इमरजेंसी' के रूप में देखा जा रहा है। आमजन को बूंद-बूंद पानी के लिए भारी संघर्ष करना पड़ रहा है, और आने वाले दिनों में यह चुनौती और भी विकराल होने की संभावना है।
आंकड़ों के अनुसार, राज्य के मात्र 110 शहरों में ही फिलहाल प्रतिदिन जलापूर्ति हो पा रही है। बाकी क्षेत्रों में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं, जहां लोगों को पानी के लिए 48 से लेकर 96 घंटों तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इस अनियमित आपूर्ति से दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
गर्मी का मौसम अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है और जलाशयों का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। प्रशासन की ओर से पानी की बर्बादी रोकने के निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बहुत बड़ा है। दूरदराज के इलाकों में टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
स्थानीय प्रशासन और जलदाय विभाग इस स्थिति से निपटने के लिए आकस्मिक योजनाओं पर काम कर रहे हैं। हालांकि, पाइपलाइन नेटवर्क की कमी और गिरते भूजल स्तर के कारण तत्काल समाधान निकालना मुश्किल हो रहा है। आम जनता से जल संरक्षण की अपील की जा रही है ताकि भीषण गर्मी के आगामी दौर का सामना किया जा सके।