पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर राजस्थान की वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर 'इंतजार शास्त्र, चैप्टर 12' शीर्षक से एक पोस्ट जारी की है, जिसमें उन्होंने राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं। गहलोत का यह कटाक्ष राज्य की नीतियों और निर्णयों में हो रही देरी को लेकर है।
अपने इस बयान में गहलोत ने आरोप लगाया है कि मौजूदा सरकार लोकतांत्रिक चर्चा और संवाद से पूरी तरह घबरा रही है। उनका मानना है कि जनता के मुद्दों पर सदन में या सार्वजनिक मंचों पर खुलकर बात करने के बजाय सरकार बचती हुई नजर आ रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के स्वस्थ मानदंडों के खिलाफ बताया है।
गहलोत ने कहा कि सरकार की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का अभाव है और जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए केवल इंतजार करने को मजबूर है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि शासन का अर्थ केवल आदेश देना नहीं, बल्कि जनहित में संवाद स्थापित करना भी होता है, जिसमें वर्तमान नेतृत्व विफल साबित हो रहा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का यह बयान राजस्थान की राजनीति में एक नई बहस का कारण बन गया है। गहलोत के इस 'इंतजार शास्त्र' सीरीज को राजनीतिक गलियारों में सरकार की घेराबंदी की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी नेता लगातार राज्य सरकार की विफलताएं गिनाने के लिए ऐसे रचनात्मक तरीकों का उपयोग कर रहे हैं।