राजस्थान के राज्य पशु ऊंटों की गिरती संख्या ने एक बार फिर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। हाईकोर्ट ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को तलब किया है और स्पष्टीकरण मांगा है कि ऊंट संरक्षण के तमाम प्रयासों के बावजूद इनकी तादाद में भारी गिरावट क्यों दर्ज की जा रही है।
आंकड़ों पर गौर करें तो राजस्थान में ऊंट संरक्षण कानून लागू होने के बाद इनकी संख्या में लगभग पचास प्रतिशत की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि चरागाहों की कमी, ऊंट पालकों की आर्थिक तंगी और राज्य से बाहर ऊंटों के व्यापार पर लगी कड़े प्रतिबंधों के कारण पालकों का रुझान कम हो गया है।
अदालत ने राज्य सरकार से ऊंटों के संरक्षण के लिए चलाई जा रही योजनाओं और उनके क्रियान्वयन पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट का यह निर्देश है कि ऊंटों के अस्तित्व को बचाने के लिए ठोस और व्यवहारिक कदम उठाए जाएं ताकि यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर लुप्त होने से बच सके।
राज्य पशु का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद ऊंटों की दयनीय स्थिति पर सामाजिक संस्थाओं और पर्यावरणविदों ने भी चिंता जताई है। अब उम्मीद है कि हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद सरकार ऊंटों के संवर्धन के लिए कोई नई प्रभावी नीति तैयार करेगी, जिससे उनकी घटती संख्या पर अंकुश लगाया जा सके।