राजस्थान के नगर निगम प्रशासन पर एक बार फिर लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। हाल ही में सामने आए जनगणना कार्य की सूची में प्रशासन ने उन कर्मचारियों को भी ड्यूटी पर तैनात कर दिया, जिनकी या तो मृत्यु हो चुकी है या जो काफी समय पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस बड़ी चूक ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
आधिकारिक सूची जारी होने के बाद जब स्थानीय स्तर पर मिलान किया गया, तो पता चला कि इसमें मृत व्यक्तियों के नाम भी शामिल हैं। यह प्रशासनिक डेटा प्रबंधन की पोल खोलने वाली घटना है। विभाग द्वारा बिना किसी सत्यापन के कर्मचारियों की सूची जारी करना अधिकारियों की घोर लापरवाही को दर्शाता है, जिससे अब विभाग की काफी किरकिरी हो रही है।
इस मामले के सामने आते ही कर्मचारी संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा डेटा को अपडेट न करना और फील्ड वर्क की जमीनी हकीकत को न समझना एक गंभीर अपराध है। यदि समय रहते इस डेटा को सुधारा नहीं गया, तो आने वाले समय में जनगणना का महत्वपूर्ण कार्य भी प्रभावित हो सकता है।
नगर निगम प्रशासन अब इस मामले में सफाई देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि डिजिटल युग में भी सरकारी दफ्तरों में पुरानी फाइलों के आधार पर काम करना सिस्टम की विफलता है। फिलहाल, संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।