राजस्थान की राजनीति में परिवारवाद का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। बीजेपी द्वारा कांग्रेस पर लगातार किए जा रहे हमलों के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने राजनीति में अपने परिवार को बढ़ावा देने के बजाय जनता की सेवा को प्राथमिकता दी है।
अशोक गहलोत ने अपने बेटे वैभव गहलोत के चुनावी सफर और राजनीति में उनके प्रवेश पर उठ रहे सवालों पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने जो भी किया है, वह अपनी मेहनत और कार्यकर्ताओं के समर्थन के दम पर किया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजनीति में आना कोई अपराध नहीं है, बशर्ते वह योग्यता के आधार पर हो।
बीजेपी ने गहलोत सरकार पर आरोप लगाया था कि कांग्रेस का ध्यान केवल अपने परिवारों को सुरक्षित रखने और राजनीति में स्थापित करने पर केंद्रित है। इस पर पलटवार करते हुए गहलोत ने बीजेपी को आईना दिखाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या बीजेपी में परिवारवाद के उदाहरण नहीं हैं और क्यों पार्टी केवल कांग्रेस को ही निशाना बना रही है।
गहलोत ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की और कहा कि इस तरह के बेबुनियाद आरोपों से पार्टी का मनोबल नहीं गिरेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों और समान अवसर में विश्वास रखती है। राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में गहलोत के इस बयान के बाद सियासी हलचल और तेज हो गई है।