राजस्थान में राजनीतिक गतिविधियों के लिए जुटाए गए चंदे के आंकड़ों ने सभी को चौंका दिया है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी को 87 करोड़ रुपये और कांग्रेस को 25 करोड़ रुपये का भारी-भरकम डोनेशन प्राप्त हुआ है। यह राशि राज्य की राजनीति में बढ़ते धनबल के प्रभाव को दर्शाती है।
इस कुल चंदे में से करीब 69 करोड़ रुपये की बड़ी राशि केवल बड़े बिजनेस घरानों द्वारा दी गई है। कॉरपोरेट जगत का राजनीतिक दलों की ओर यह झुकाव आगामी चुनावों के लिए उनकी रणनीतिक भागीदारी को स्पष्ट करता है। चंदा देने वाली कंपनियों में कई प्रमुख औद्योगिक घराने शामिल हैं।
राजनीतिक दलों को मिलने वाला यह चंदा चुनावी पारदर्शिता पर फिर से सवाल खड़े कर रहा है। चुनाव आयोग के नियमों के तहत, दलों को अपने वित्तीय स्रोतों का ब्यौरा देना अनिवार्य है। इन आंकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।
जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में धन का प्रवाह राजनीतिक विज्ञापनों, प्रचार सामग्री और अन्य चुनावी गतिविधियों पर खर्च किया जाएगा। आम जनता के बीच भी इस बात को लेकर चर्चा है कि क्या इतने बड़े कॉर्पोरेट चंदे के बदले में भविष्य की नीतियों में उद्योगपतियों का प्रभाव बढ़ेगा।