राजस्थान में आगामी पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सितंबर महीने तक किसी भी प्रकार के स्थानीय निकाय या पंचायत चुनाव आयोजित नहीं किए जाएंगे। इस फैसले से चुनावी तैयारियों में लगे राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को और समय मिल गया है।
इस देरी का मुख्य कारण अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के कार्यों का अधूरा होना बताया जा रहा है। सरकार ने राज्य ओबीसी आयोग का कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय लिया है। आयोग को राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग की स्थिति और आरक्षण से संबंधित विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन करने का जिम्मा सौंपा गया है।
आयोग द्वारा दी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर ही भविष्य में चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरक्षण के जटिल मुद्दों को सुलझाने के लिए सरकार कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती है। डेटा का सही और सटीक होना चुनाव के लिए बेहद आवश्यक माना जा रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर चुनाव टालने के आदेश के बाद अब चुनावी आचार संहिता और अन्य प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ेगा। स्थानीय निकायों के कामकाज को लेकर भी अब सरकार आगामी रणनीति तैयार करेगी। जनता अब अक्टूबर या उसके बाद ही अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएगी।